गहवर वन
गहवर यानी गहरा, घना। गहवर वन बरसाना की पहाड़ी को घेरे पुराना वन है, छायादार और हरा, बीच में एक कुंड जहाँ राधा कृष्ण जल क्रीड़ा करते थे। यह बरसाना की सबसे शांत जगह है, और सुबह के समय सबसे ज़्यादा गाई जाने वाली।
बीच का कुंड
इसे राधा सरोवर भी कहते हैं। ब्रज यहाँ राधा कृष्ण की जल क्रीड़ा की कथा कहता है, और गौड़ीय परंपरा मधुमंगल के लड्डुओं की। पास का मंदिर गहवर वन बिहारी जी का है।
जहाँ कृष्ण नाचे
अंदर जाते ही दाहिनी ओर। राधा का मान तोड़ने के लिए कृष्ण यहाँ मोर बनकर नाचे, सामने मानगढ़।
वन का आश्रम
मान मंदिर सेवा संस्थान का दफ़्तर गहवर वन में है और उसने दशकों से इस वन को लगाया और बचाया है। उसकी 84 कोस ब्रज यात्रा हर कार्तिक यहीं पूरी होती है।
कैसे पहुँचें
| जानकारी | |
|---|---|
| कहाँ | चिकसौली गाँव में, बरसाना से सटा, थाना बरसाना से लगभग 1.5 किमी |
| रास्ता | राधा कुशल बिहारी (जयपुर) मंदिर के पीछे से, श्रीजी वाली पहाड़ी के दूसरी ओर उतरकर |
| समय | मंदिरों वाला वन, दिन के उजाले में खुला; मंदिर सुबह और शाम के सामान्य समय पर |
| कितना समय | धीरे घूमने में एक घंटा; परिक्रमा में आता है |
अच्छे से घूमिए
- सुबह जल्दी आइए, जब कीर्तन मंडलियाँ निकलती हैं और पक्षियों का शोर रहता है।
- खाना और थैले बंद रखिए; बरसाना की पहाड़ियों पर हर जगह बंदर निडर हैं।
- बारिश में रास्ते कीचड़ वाले और कुंड भरा रहता है। पकड़ वाली चप्पल।
गहवर वन के आसपास
गहवर वन
बरसाना में गहवर वन कहाँ है?
चिकसौली गाँव में, जो बरसाना से सटा है, थाना बरसाना से लगभग 1.5 किमी। अंदर का रास्ता जयपुर (राधा कुशल बिहारी) मंदिर के पीछे से शुरू होता है।
गहवर वन में क्या है?
कृष्ण कुंड (राधा सरोवर भी कहते हैं) और गहवर वन बिहारी मंदिर, मोर कुटी जहाँ कृष्ण मोर बनकर नाचे, और मान मंदिर आश्रम का दफ़्तर।
गहवर वन का समय क्या है?
यह वन है, दिन के उजाले में खुला। अंदर के मंदिर सुबह शाम के सामान्य समय पर खुलते हैं।
क्या गहवर वन बरसाना परिक्रमा में आता है?
हाँ। परिक्रमा इसके बीच से जाती है, और मान मंदिर की 84 कोस ब्रज यात्रा यहीं पूरी होती है।
गहवर का अर्थ क्या है?
गहरा या घना: गहवर वन बरसाना की पहाड़ी के चारों ओर का घना वन है।
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