इतिहास · History

बरसाना का इतिहास

बरसाना एक ही कारण से प्रसिद्ध है, और बाकी सब उसी से निकलता है: यहीं राधा पली बढ़ीं। पहाड़ी का मंदिर, लट्ठमार होली, राधाष्टमी और हर साल सीढ़ियाँ चढ़ते लाखों लोग, सब उन्हीं के लिए हैं। यह इतिहास है, जितना पक्का कहा जा सकता है, और जहाँ नहीं कहा जा सकता, वहाँ भी।

नाम

पुराने वर्णन इस जगह को बृहत्सानु या ब्रह्मसानु, यानी बड़ी चोटी या ब्रह्मा की चोटी, और वृषभानुपुर, राधा के पिता वृषभानु का नगर, कहते हैं। आज सब इसे बरसाना कहते हैं।

क़स्बा दो पहाड़ियों की तलहटी में है। चार चोटियों में से तीन, भानुगढ़ (सबसे ऊँची, जिस पर श्रीजी हैं), मानगढ़ और दानगढ़, ब्रह्मा पर्वत पर हैं; विलासगढ़ सांकरी खोर के पार विष्णु पर्वत पर है।

राधा रानी मंदिर किसने बनवाया

मतक्या कहता हैस्रोत
परंपराकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने लगभग 5,000 साल पहले पहाड़ी पर राधा कृष्ण की स्थापना कीब्रज परंपरा; विकिपीडिया और इनक्रेडिबल इंडिया में भी
नारायण भट्टसमय के साथ खोया विग्रह सोलहवीं सदी में नारायण भट्ट ने फिर खोजा और स्थापित किया; एक वर्णन मंदिर को संवत 1626, लगभग 1569 का बताता हैब्रजरसिक, भक्ति भारत
राजा टोडरमलआज की इमारत का श्रेय नारायण भट्ट को, अकबर के दरबार के राजा टोडरमल की मदद सेविकिपीडिया
1675, बीर सिंह देवबहुत से गाइड कहते हैं ओरछा के राजा बीर सिंह देव ने 1675 में बनवाया। उनका देहांत 1627 में हुआ, इसलिए नाम और तारीख़ दोनों सही नहीं हो सकतेविकिपीडिया और यात्रा साइटें

लाडली जी वही विग्रह हैं जो नारायण भट्ट ने खोजा; उनके ग्रंथ और वंश बरसाना के संत पर।

1773: एक युद्ध और आठ महीने का वियोग

मुग़ल सत्ता के बिखरने के बाद के युद्धों में बादशाह शाह आलम की ओर से लड़ते मिर्ज़ा नजफ़ ख़ान ने बरसाना के पास नवल सिंह की जाट सेना को हराया। जाट इतिहासकार कालिका रंजन क़ानूनगो इसे 31 अक्टूबर 1773 का बताते हैं; कुछ आधुनिक स्रोत 1775 लिखते हैं।

बरसाना याद रखता है कि उसके बाद क्या हुआ। स्थानीय वर्णन के अनुसार मंदिर पर क़ब्ज़ा हुआ, क़स्बा लूटा गया, और सेवायत लाडली जी को आठ महीने के लिए मध्य प्रदेश के श्योपुर ले गए। उस बीच पहाड़ी पर विजय लाडली नाम के सखी रूप की पूजा हुई। क़ानूनगो के इतिहास में लूट का ज़िक्र नहीं है; अमर उजाला ने 2021 में यह स्थानीय वर्णन छापा।

जयपुर मंदिर

श्रीजी से आधा किलोमीटर, उसी पहाड़ी पर राधा कुशल बिहारी मंदिर है, जिसे बरसाना जयपुर मंदिर कहता है: राजस्थान के एक राजा ने इसे तब बनवाया जब राधा रानी ने उन्हें स्वप्न दिया। एक वर्णन जयपुर के महाराजा माधो सिंह का नाम लेता है और कहता है कि मंदिर में उनकी रानी कुशल कँवर का नाम है।

पिछले पचास साल का बरसाना

सालक्या हुआ
1954रमेश बाबा ब्रज आए, और बाद में मानगढ़ पर बसे, जहाँ मान मंदिर खंडहर था
1988मान मंदिर की पहली राधा रानी ब्रज यात्रा, 84 कोस
1996जगद्गुरु कृपालु जी महाराज ने रंगीली महल की स्थापना की
2007माताजी गौशाला शुरू (7 जुलाई); मुफ़्त अस्पताल जगद्गुरु कृपालु चिकित्सालय शुरू (14 जनवरी)
2019वसंत पंचमी, 10 फ़रवरी को रंगीली महल में कीर्ति मंदिर खुला; रमेश बाबा को पद्मश्री
2024 से 2025श्रीजी तक रोपवे शुरू
6 अक्टूबर 2026मान मंदिर में रमेश बाबा का देहावसान
जल्दी के जवाब

बरसाना का इतिहास

बरसाना क्यों प्रसिद्ध है?

यह राधा रानी का घर है: उनके पिता वृषभानु का नगर, जहाँ वे पली बढ़ीं। भानुगढ़ पहाड़ी का श्री राधा रानी (लाडली जी) मंदिर, लट्ठमार होली और राधाष्टमी, सब इसी से हैं।

बरसाना का राधा रानी मंदिर किसने बनवाया?

परंपरा कहती है कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने पहली बार स्थापना की। सोलहवीं सदी में नारायण भट्ट ने लाडली जी को फिर खोजा; आज की इमारत का श्रेय उन्हें राजा टोडरमल की मदद से दिया जाता है। प्रचलित 1675 और राजा बीर सिंह देव वाली बात सही नहीं हो सकती, क्योंकि उनका देहांत 1627 में हुआ।

राधा रानी मंदिर कितना पुराना है?

विग्रह की पूजा सोलहवीं सदी में नारायण भट्ट से मानी जाती है; एक वर्णन संवत 1626, लगभग 1569 बताता है। परंपरा इसे 5,000 साल पहले वज्रनाभ तक ले जाती है।

बरसाना का पुराना नाम क्या था?

बृहत्सानु या ब्रह्मसानु, यानी बड़ी चोटी या ब्रह्मा की चोटी, और राधा के पिता के नाम पर वृषभानुपुर।

क्या बरसाना मंदिर पर हमला हुआ था?

1773 में नजफ़ ख़ान ने बरसाना के पास जाटों को हराया। स्थानीय वर्णन कहते हैं मंदिर पर क़ब्ज़ा हुआ और लाडली जी आठ महीने श्योपुर में सुरक्षित रखी गईं।

बरसाना की चार चोटियाँ कौन सी हैं?

भानुगढ़ (श्रीजी वाली), मानगढ़, दानगढ़ और विलासगढ़।

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